वित्त वर्ष 2026-27 में वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000 बनाम ₹50,000

आयकर अधिनियम 2025 के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 में स्टैंडर्ड डिडक्शन: नई व्यवस्था में ₹75,000 और पुरानी में ₹50,000, कौन दावा कर सकता है, ₹12 लाख की छूट के साथ यह कैसे काम करता है और किन गलतियों से बचें।

स्टैंडर्ड डिडक्शन वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए उपलब्ध सबसे सरल कर लाभ है। इसके लिए न कोई निवेश चाहिए, न बिल, न कोई कागज़ी कार्रवाई। फिर भी इसे लेकर कई भ्रम हैं, विशेषकर 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम 2025 लागू होने के बाद। यह लेख बताता है कि वित्त वर्ष 2026-27 (जिसे अब “कर वर्ष 2026-27” कहा जाता है) में आप कितना दावा कर सकते हैं, कौन पात्र है, और यह कटौती नई व्यवस्था की उस छूट के साथ कैसे काम करती है जो ₹12 लाख तक की आय को कर-मुक्त बनाती है।

यह लेख अंग्रेज़ी में पढ़ें: Standard Deduction for Salaried Employees and Pensioners in FY 2026-27

मुख्य बातें

  • वित्त वर्ष 2026-27 में स्टैंडर्ड डिडक्शन नई व्यवस्था में ₹75,000 और पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 है, जो पिछले वर्ष के समान है।
  • यह वेतनभोगी कर्मचारियों और अपनी स्वयं की पेंशन पाने वालों को मिलता है। फ़ैमिली पेंशन पाने वालों के लिए अलग और छोटी कटौती है।
  • नई व्यवस्था की छूट के साथ ₹12.75 लाख तक के वेतन पर कोई आयकर नहीं लगता।
  • एक व्यक्ति को वर्ष में केवल एक ही स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, चाहे कितने भी नियोक्ता रहे हों।

स्टैंडर्ड डिडक्शन क्या है?

स्टैंडर्ड डिडक्शन एक निश्चित राशि है जो कर की गणना से पहले आपके वेतन या पेंशन की आय में से घटाई जाती है। अधिकांश अन्य कटौतियों के विपरीत, यह इस पर निर्भर नहीं करती कि आप पैसा कैसे खर्च या निवेश करते हैं। इसके लिए कोई बिल या प्रमाण नहीं देना होता और नियोक्ता TDS की गणना करते समय इसे स्वतः लागू करता है।

आयकर अधिनियम 2025 में स्टैंडर्ड डिडक्शन धारा 19 के अंतर्गत है। पुराने आयकर अधिनियम 1961 में यही लाभ धारा 16(ia) में था, जो वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न पर लागू रहती है।

वित्त वर्ष 2026-27 में कितना दावा कर सकते हैं?

विवरणनई व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट)पुरानी व्यवस्था
वेतन या पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन₹75,000₹50,000
फ़ैमिली पेंशन पर कटौतीफ़ैमिली पेंशन का एक-तिहाई या ₹25,000, जो कम होफ़ैमिली पेंशन का एक-तिहाई या ₹15,000, जो कम हो
आय पर छूट (रिबेट)₹60,000 तक; ₹12 लाख तक की कर योग्य आय कर-मुक्त₹12,500 तक; ₹5 लाख तक की कर योग्य आय कर-मुक्त
चुकाया गया व्यवसाय कर (प्रोफ़ेशनल टैक्स)कटौती नहींकटौती योग्य

यह कटौती आपके वर्ष भर के वास्तविक वेतन या पेंशन से अधिक नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए, यदि आपने मार्च में नौकरी शुरू की और कुल वेतन ₹40,000 मिला, तो कटौती भी ₹40,000 तक ही सीमित रहेगी।

कौन दावा कर सकता है?

  • वेतनभोगी कर्मचारी, सरकारी या निजी क्षेत्र में।
  • पेंशनभोगी, जिन्हें पूर्व नियोक्ता से पेंशन मिलती है, क्योंकि ऐसी पेंशन पर वेतन के रूप में कर लगता है।
  • फ़ैमिली पेंशन पाने वालों (यानी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पेंशन पाने वाले परिजनों) को स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं मिलता। फ़ैमिली पेंशन पर “अन्य स्रोतों से आय” के रूप में कर लगता है, और नए अधिनियम की धारा 93(1)(d) इसके एक-तिहाई की अलग कटौती देती है, जिसकी सीमा नई व्यवस्था में ₹25,000 और पुरानी में ₹15,000 है।
  • स्व-रोज़गार पेशेवर और व्यवसायी पात्र नहीं हैं, क्योंकि उन्हें वेतन नहीं मिलता। वे वास्तविक व्यावसायिक खर्च या अनुमानित कराधान योजना के माध्यम से कर योग्य आय कम करते हैं।

₹12 लाख की छूट के साथ यह कैसे काम करता है

नई व्यवस्था में आयकर अधिनियम 2025 की धारा 156 (पहले धारा 87A) ₹60,000 तक की छूट देती है, जो ₹12 लाख तक की कर योग्य आय पर पूरा कर समाप्त कर देती है। वेतनभोगी के लिए पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाया जाता है। इसीलिए ₹12.75 लाख तक के वेतन पर कोई कर नहीं लगता: ₹12.75 लाख में से ₹75,000 घटाने पर कर योग्य आय ठीक ₹12 लाख रह जाती है।

नीचे की तालिका में बिना किसी अन्य आय वाले वेतनभोगी पर नई व्यवस्था में देय कर दिखाया गया है। आँकड़ों में 4% स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (सेस) शामिल है।

वार्षिक वेतनस्टैंडर्ड डिडक्शनकर योग्य आयदेय कर (नई व्यवस्था)
₹10,00,000₹75,000₹9,25,000शून्य
₹12,75,000₹75,000₹12,00,000शून्य
₹13,00,000₹75,000₹12,25,000₹26,000 (मार्जिनल रिलीफ़ के बाद)
₹15,00,000₹75,000₹14,25,000₹97,500
₹20,00,000₹75,000₹19,25,000₹1,92,400

मार्जिनल रिलीफ़: यदि कर योग्य आय ₹12 लाख से थोड़ी ही अधिक है, तो देय कर उस राशि तक सीमित रहता है जितनी आय ₹12 लाख से अधिक है। ऊपर के ₹13 लाख वाले उदाहरण में कर योग्य आय ₹12 लाख से ₹25,000 अधिक है, इसलिए कर ₹63,750 और सेस के बजाय केवल ₹25,000 और सेस रहता है। यह राहत लगभग ₹12.7 लाख की कर योग्य आय तक मिलती है।

ध्यान दें: यह छूट विशेष दरों पर कर योग्य आय, जैसे शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड के पूंजीगत लाभ, पर लागू नहीं होती। वेतन पूरी तरह छूट में आ जाए तब भी ऐसे लाभ पर कर देय रहता है।

पुरानी व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन

पुरानी व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000 है और छूट केवल ₹5 लाख तक की कर योग्य आय पर मिलती है। पुरानी व्यवस्था में धारा 123 (पहले 80C) के अंतर्गत PPF, ELSS और जीवन बीमा प्रीमियम जैसी अन्य कटौतियाँ और व्यवसाय कर की कटौती भी मिलती है। फिर भी अधिकांश वेतनभोगियों के लिए नई व्यवस्था में कर कम आता है।

नई व्यवस्था में एक और उपयोगी कटौती

स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा, नई व्यवस्था में वेतनभोगियों को उनके NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) खाते में नियोक्ता के योगदान पर धारा 124(1) के अंतर्गत मूल वेतन और महँगाई भत्ते के 14% तक की कटौती मिलती है। यदि आपका नियोक्ता यह विकल्प देता है, तो HR से पूछें कि क्या वेतन का एक हिस्सा नियोक्ता के NPS योगदान के रूप में रखा जा सकता है।

इन गलतियों से बचें

  1. नौकरी बदलने पर दो बार कटौती लेना। वर्ष के बीच नौकरी बदलने पर दोनों नियोक्ता TDS में स्टैंडर्ड डिडक्शन लगा सकते हैं। नए नियोक्ता को पिछले वेतन और TDS की जानकारी दें, अन्यथा रिटर्न भरते समय अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है।
  2. फ़ैमिली पेंशन पर ₹75,000 की कटौती लेना। फ़ैमिली पेंशन की अपनी अलग, छोटी कटौती है।
  3. यह मानना कि पूंजीगत लाभ भी ₹12 लाख की छूट में आता है। ऐसा नहीं है।
  4. कर व्यवस्था सोच-समझकर न चुनना। नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है; पुरानी व्यवस्था बेहतर हो तो उसे स्वयं चुनना पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026-27 में वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन कितना है?

आयकर अधिनियम 2025 की धारा 19 के अंतर्गत नई व्यवस्था में ₹75,000 और पुरानी व्यवस्था में ₹50,000।

AY 2026-27 के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन कितना था?

AY 2026-27, यानी वित्त वर्ष 2025-26 की आय के लिए भी आयकर अधिनियम 1961 की धारा 16(ia) के अंतर्गत नई व्यवस्था में ₹75,000 और पुरानी में ₹50,000 था।

क्या पेंशनभोगियों को स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है?

हाँ, पूर्व नियोक्ता से मिलने वाली पेंशन पर। फ़ैमिली पेंशन पर यह नहीं मिलता, परंतु उस पर नई व्यवस्था में ₹25,000 तक की अलग कटौती है।

क्या इसके लिए कोई प्रमाण देना होता है?

नहीं। यह एक निश्चित राशि है और इसके लिए किसी बिल, निवेश या प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।

क्या ₹12.75 लाख का वेतन वास्तव में कर-मुक्त है?

नई व्यवस्था में हाँ, बशर्ते कोई अन्य आय या विशेष दरों पर कर योग्य आय न हो। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद कर योग्य आय ₹12 लाख रहती है, जिस पर पूरा कर छूट में आ जाता है।

संबंधित लेख: हिन्दी में सभी लेख, और Old vs New Tax Regime FY 2026-27 (अंग्रेज़ी)।

अस्वीकरण: गणनाएँ केवल वेतन आय वाले निवासी व्यक्ति के लिए उदाहरणार्थ हैं और इनमें सरचार्ज, विशेष दर वाली आय और अन्य छूट शामिल नहीं हैं। यह लेख नवंबर 2026 तक उपलब्ध आयकर अधिनियम 2025 के सार्वजनिक नियमों पर आधारित है, जो बदल सकते हैं। यह सामान्य जानकारी है, कर सलाह नहीं। रिटर्न भरने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट से परामर्श करें। इस लेख पर निर्भरता से होने वाली किसी भी हानि के लिए Mungekar Wealth उत्तरदायी नहीं है।

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About the Author

Sameer Mungekar worked in India’s investment and personal finance industry from 2015 to 2025, advising individuals and families on mutual funds and insurance. He holds a Commerce degree from the University of Mumbai and completed NISM certifications in Series 5A/5C (Mutual Fund Distributor), 10A/10B (Investment Adviser), 15 (Research Analyst) and 17 (Retirement Adviser), along with an IRDA certification for insurance advisers; these have since lapsed. He now writes Mungekar Wealth as an independent educational resource and does not offer personalised investment advice.